नारी शक्ति

नारी शक्ति जैसी शक्ति कही तुम्हे ना पायेगी,
दर दर भटकोगे भी जो तुम कही ये मिल ना पायेगी

शक्ति और ममता की वो ऐसी एक मिसाल है,
जिसको देख के नर भी सोचे वो कुदरत का कमाल है

सहनशीलता की है वो सबसे बड़ी मूरत,

दी है जिसको उसके रब ने इक प्यारी सी सूरत

रब ने भी कुछ सोच के उसकी शक्ति को रचाया है,

उससे ही तो उसने पूरा संसार बनाया है

ना होती अगर नारी तो सोचो तुम क्या होता?

ना तुम होते,ना मैं होता और ना ही कोई इन्सा होता

नारी को शक्ति देकर ही उसने जहान रचाया है,

और नारी से ही तो उसने सृष्टि के कण कण  को महकाया है

कुदरत के इस खेल को कोई समझ ना पाया है,

कैसे उसने नारी को इतना खूब रचाया है।

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